Thursday, October 21, 2021

लॉक डाउन हुआ है तो क्या हुआ ‘मन को डाउन न करे-डॉ नेहाश्री श्रीवास्तव मनोवैज्ञानिक

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*लॉक डाउन हुआ है तो क्या हुआ ‘मन को डाउन न करे*

कहते है कि”मन के हारे हार है ,मन के जीते जीत”l. हमारे इस पूरे मानव शरीर मे एक हमारा मन ही है जिस पर हम नियंत्रण कर सकते है इसके अतिरिक्त कुछ भी नही।हमारा मन यदि हमारे नियंत्रण में रहना सीख ले और उसके हिसाब से क्रिया प्रतिकिया करे तो हम हर परेशानी का सामना सरलता पूर्वक कर सकते है।जीवन मे सुख दुख, उतार चढ़ाव तो जबसे हमने जन्म लिया है,तभी से देखते आ रहे है,आज कोई पहली बार न हम परेशान है न ही देश।

इसमे कोई नहीं संदेह नही है कि जीवन मे हर प्रकार की चिंता,तनाव,समस्या का स्वरूप व उसकी तीव्रता अलग अलग होती है और इस बात पर भी संदेह नही कि उसका सामना करने वाले लोगो का स्वरूप व तीव्रता भी पूर्णतया अलग अलग है।
आज न केवल हमारा देश अपितु सम्पूर्ण विश्व त्राहि त्राहि कर रहा है।एक कहावत तो आपने सुनी ही होगी कि”बूंद बूंद से साग़र भरता है”बिल्कुल उसी प्रकार से यदि बूंद बूंद आपका साथ ,सकारात्मक सोच’अनुशासन समाज और देश को मिलेगा तो निश्चित रूप से हम सब जीत का सागर भर पाएंगे।
अगर थोड़ी देर के लिए हम कोरोना शब्द को भूल जाये तो निश्चित रूप से हम सभी आज एक आरामदेय, शांत,मन चाहा वक़्त बिता रहे है जिसकी शायद हम सबको बरसो से न बिता पाने की एक शिकायत सी थी जैसे-
*”हमे तो समय ही नही मिलता न अपना ही ध्यान दे पाते है न ही घर का”

इतना टाइम नही मिल पाता कि मनपसंद खाना ही बना पाए भागम भाग रहती है

पूजा तक तो ठीक से करने का टाइम नहीं मिल पाता

कितने दिन हो गए घर मे सबके साथ बैठकर गपशप किये हुए साथ मे खाना ही खाये हुए।

सालो बीत गए अपनी मर्जी की नींद पूरी किये हुए

हमे टाइम मिलता तो कुछ आराम से हम भी क्रिएटिव कर पाते।
इत्यादि सैकड़ो शिकायतें व ख्वाइशें हम इस लॉक डाउन के पूर्व बुनते थे ।आज प्रकृति और वक़्त ने हमे बहुत ही अच्छा अवसर प्रदान किया है अपनी दिनचर्या को एक आराम और उत्साह देने का।
ये तो अपने अपने मन को समझाने, बताने व उसे नियंत्रित करने पर निर्भर करता है।वर्तमान स्थिति में हम सबका अनुशासन में बने रहकर प्रसन्नता पूर्वक अपना योगदान देना ही देश को ताकत प्रदान करता है।
हम सब वीरो की गाथायें सुनते है,देश के तमाम वीर वीरांगनाओं के योगदान की प्रशंसा करते नही थकते चाहे वह किसी भी धर्म ,जाति, कुल या संस्कृति का ही क्यू न हो?आज देश मे अपना योगदान दे रहे पुलिस,डॉक्टर, सफाई कर्मी,मीडिया ,प्रशासन, बैंकर्स इत्यादि कि हम सब सराहना कर रहे है तो क्यू न एक सराहनीय कदम हमारा भी हो और देश हमे भी प्रशंसा व शाबाशी से नवाजे। आज अवसर और मौका आपके पास है केवल आपको अपनी इक्षाशक्ति को जगाने मात्र की देरी है। सभी अपने अपने कार्यो से देश के लिए ताकत बने न कि बोझ।क्योंकि बंधी हुई मुट्ठी में बहुत ही ताकत व सकारात्मक ऊर्जा होती है।अतः इस लॉक डाउन में मन को डाउन न करे इसके लिए

 

इन बातों का रखे ख्याल तनाव से रहेंगे दूर-डॉ

नेहाश्री श्रीवास्तव ;मनोवैज्ञानिक

लोगो से जुड़े,सकारात्मक स्वस्थ बातचीत करते रहे।

अपने शरीर व मनःस्थिति को सकारात्मक ऊर्जा का स्रोत बनाये।

अपने द्वारा किये जा रहे हर एक सकारात्मक कार्य के लिए स्वयं को भी धन्यवाद दे।

अफवाहों का शिकार होने से बचें।

नकारात्मक ऊर्जा देने वाली ऊर्जाओं से दूर रहे।

अधिकतम समय इसी विचार और प्रार्थना में लगाये कि”जल्दी ही सब अच्छा होगा” All is Well

घर मे रहकर अपने मनपसंद कार्यो(हॉबी) को करे इससे आपका मानसिक स्वास्थ्य बहुत ही अच्छा रहेगा।

स्वस्थ व पोषित खानपान पर भी ध्यान दे।

सबसे महत्वपूर्ण बिंदु कि सरकार द्वारा दिये जा रहे सभी निर्देशो का उत्साहपूर्वक पालन करे और दूसरे लोगो को भी प्रेरित करे।

 

डॉ नेहाश्री श्रीवास्तव बताती है-मन मे है विस्वास तो हम कामयाब जरूर होंगे—-

उपर्युक्त सभी बिन्दुओं के करीब रहे और उसका निरंतर पालन करते रहे।ये बुरा वक्त है ,जल्दी ही गुजर जाएगा।यदि जीवन मे बुरा शब्द नही होता तो अच्छे शब्द की परिकल्पना ही असंभव थी। एक ही गीत प्रार्थना स्वरूप गुनगुनाते रहे-
हंसते हंसते कट जाए रस्ते,
जिंदगी यूँ ही चलती रहे।
खुशी मिले य गम बदलेंगें न हम,
दुनिया चाहे बदलती रहे।
क्योंकि-
 मन मे है विश्वास पूरा है विश्वास
हम होंगे कामयाब एक दिन।।
जय हिंद जय भारत।

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