Saturday, September 18, 2021

कश्मीर से धारा 370 व पुनर्गठन बिल पर शाह के प्रस्ताव को मिले 125 मत फिर एक बार मोदी सरकार ने रचा इतिहास मोदी ने पीठ थपथपा कर दी शाह को शुभकामना-

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    रिपोर्ट-गौरव बाजपेयी

     

    राज्यसभा में सोमवार को गृहमंत्री अमित शाह ने अनुच्छेद 370 को हटाने का प्रस्ताव पेश किया। इसके अलावा राज्य के पुनर्गठन का प्रस्ताव भी पेश किया गया। जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन बिल पर भी राज्यसभा में वोटिंग हुई। बिल के पक्ष में 125 वोट पड़े जबकि 61 वोट विपक्ष में पड़े। मशीन में तकनीकी परेशानी के चलते सभी सदस्यों को पर्ची बांटी गई।
    अमित शाह ने प्रस्ताव पेश करते हुए कहा कि जम्मू-कश्मीर को सबसे विकसित राज्य बनाएंगे। वो हमेशा केंद्र शासित प्रदेश नहीं रहेगा। हालात सामान्य होने पर फिर से पूर्ण राज्य बनाएंगे।
    लोहिया ने कहा था कि 370 के रहते जम्मू-कश्मीर का भारत में विलय संभव नहीं। अब धारा 370 के जाने का समय आ गया है। धारा 370 को हटाने के लिए राजनीतिक इच्छाशक्ति चाहिए थी। कुछ लोग कहते हैं कि ये कोसावो बन जाएगा, लेकिन आपको कहता हूं कि ये स्वर्ग था, है और रहेगा। इसे कोसावो नहीं बनने देंगे।नेहरू ने कहा था, धारा 370 घिसते-घिसते घिस जाएगी। 70 साल में धारा 370 घिसी नहीं। कुछ लोगों ने 370 को संभालकर रखा।जम्मू-कश्मीर को नेहरू ने डील किया था, सरदार पटेल ने नहीं। कश्मीर मामले को सरदार पटेल नहीं देख रहे थेधारा 370 नहीं गई तो आतंकवाद पर काबू पाना मुश्किल। कहते हैं कि धारा 370 नहीं रही तो जम्मू-कश्मीर भारत के साथ नहीं रह पाएगा। लेकिन बाकी राज्यों ने ऐसी धारा के बिना अपनी भाषा-संस्कृति बचाकर रखी है। 370 कहां से आपकी संस्कृति की रक्षा करता है। धारा 370 सिर्फ तीन परिवारों की सुरक्षा करता है।गुलाम नबी आजाद ने कहा कि अंतर-राज्य विवाह हो रहे हैं। यदि जम्मू-कश्मीर की लड़की ओडिशा के किसी पुरुष से शादी करती है, तो क्या उसे और उसके बच्चे को जम्मू-कश्मीर में कोई अधिकार मिलेगा? आप खुश हैं कि अंतर-राज्य विवाह हो रहे हैं।
    आयुष्मान भारत योजना है, लेकिन अस्पताल कहां हैं? डॉक्टर और नर्स कहाँ हैं? (कश्मीर में) 35ए का समर्थन करने वाले कृपया मुझे बताएं कि कौन से प्रसिद्ध डॉक्टर वहां जाएंगे और प्रेक्टिस करेंगे? उनके पास न तो जमीन हो सकती है और न ही घर और न ही उनके बच्चे मतदान कर सकते हैं।हम धर्म की राजनीति में विश्वास नहीं करते हैं, वोटबैंक की राजनीति क्या है? कश्मीर में केवल मुसलमान रहते हैं? तुम क्या कहना चाहते हो? मुस्लिम, हिंदू, सिख, जैन, बौद्ध सभी वहां रहते हैं। यदि अनुच्छेद 370 अच्छा है तो यह सभी के लिए अच्छा है, यदि यह बुरा है तो यह सभी के लिए बुरा है।मैं जम्मू-कश्मीर के लोगों को बताना चाहता हूं कि राज्य को 370 और 35ए से क्या नुकसान हुआ है। यह इन वर्गों के कारण है कि लोकतंत्र को पूरी तरह से लागू नहीं किया गया था, राज्य में भ्रष्टाचार बढ़ गया था, कोई भी विकास नहीं हो सकता था लोकसभा में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि गृहमंत्री अमित शाह ने आश्वासन दिया है कि कल (धारा 370 को रद्द करने के लिए) प्रस्ताव पर चर्चा होगी और वह सभी सवालों के जवाब देंगे। इसलिए सदन छोड़कर जाने का कोई मतलब नहीं बनता।इस पर
    राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने जम्मू-कश्मीर सरकार से संबंधित संविधान (जम्मू कश्मीर में लागू) आदेश 2019 जारी किया जो राज्य में भारत का संविधान लागू करने का प्रावधान करता है। राष्ट्रपति ने संविधान (जम्मू-कश्मीर में लागू) आदेश 2019 जारी किया जो तत्काल प्रभाव से लागू होगा। यह जम्मू कश्मीर में लागू आदेश 1954 का स्थान लेगा।
    इसमें कहा गया है कि संविधान के सभी प्रावधान जम्मू कश्मीर राज्य में लागू होंगे। सरकार ने कहा कि राष्ट्रपति ने संविधान के अनुच्छेद 367 में उपबंध 4 जोड़ा है जिसमें चार बदलाव किए गए हैं। इसमें कहा गया है कि संविधान या इसके उपबंधों के निर्देशों को, उक्त राज्य के संबंध में संविधान और उसके उपबंधों को लागू करने का निर्देश माना जाएगा।
    जिस व्यक्ति को राज्य की विधानसभा की सिफारिश पर राष्ट्रपति द्वारा जम्मू एवं कश्मीर के सदर ए रियासत, जो स्थानिक रूप से पदासीन राज्य की मंत्रिपरिषद की सलाह पर कार्य कर रहे हैं, के रूप में स्थानिक रूप से मान्यता दी गई है, उनके लिए निर्देशों को जम्मू एवं कश्मीर के राज्यपाल के लिए निर्देश माना जाएगा ।इसमें कहा गया है कि उक्त राज्य की सरकार के निर्देशों को, उनकी मंत्रिपरिषद की सलाह पर कार्य कर रहे जम्मू कश्मीर के राज्यपाल के लिए निर्देशों को शामिल करता हुआ माना जाएगा। अनुच्छेद 370 को निरस्त करने का राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की ओर से
    विधि एवम न्याय के द्वारा
    सा.का. नि.551 (अ) – राष्ट्रपति द्वारा किया ।
    संविधान (जम्मू और कश्मीर में लागू) आदेश, 2019
    सी.ओ 272
    संविधान के अनुच्छेद 370 के खंड (1) द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए, राष्ट्रपति, जम्मू और कश्मीर राज्य सरकार की सहमति से निम्नलिखित आदेश करते हैं:-
    1. (1) इस आदेश का नाम संविधान (जम्मू और कश्मीर के लिए लागू) आदेश, 2019 है।
    (2) यह तुरंत प्रवृत्त होगा और इसके बाद यह समय-समय पर यथा संशोधित संविधान (जम्मू और कश्मीर पर लागू) आदेश, 1954 का अधिक्रमण करेगा।
    2. समय-समय पर यथा संशोधित संविधान के सभी उपबंध जम्मू और कश्मीर राज्य के संबंध में लागू होंगे और जिन अपवादों और आशोधनों के अधीन ये लागू होंगे वे निम्न प्रकार होंगे
    अनुच्छेद 367 में निम्नलिखित खंड जोड़ा जाएगा, अर्थात :-
    (4) संविधान, जहां तक यह जम्मू और कश्मीर के संबंध में लागू है, के प्रायोजनों के लिए
    (क) इस संविधान या इसके उपबंधों के निर्देशों को, उक्त राज्य के संबंध में यथा लागू संविधान और उसके उपबंधों का निर्देश माना जाएगा।
    (ख) जिस व्यक्ति को राज्य की विधान सभा की सिफारिश पर राष्ट्रपति द्वारा जम्मू और कश्मीर के सदर-ए-रियासत, जो तत्स्थानिक रूप से पदासीन राज्य की मंत्रि परिषद की सलाह पर कार्य कर रहे हैं, के रूप में तत्स्थानिक रूप से मान्यता दी गई है, उनके लिए निर्देशों की जम्मू और कश्मीर के राज्यपाल के लिए निर्देश माना जाएगा।

    (ग) उक्त राज्य को सरकार के निर्देशों को, उनकी मंत्रिपरिषद की सलाह पर काम कर रहे जम्मू और कश्मीर के राज्यपाल के लिए निर्देशों को शामिल करता हुआ माना जाएगा –
    (घ) इस संविधान के अनुच्छेद 370 के परंतुक में “खंड (2) में उल्लिखित राज्य की संविधान सभा” अभिव्यक्ति को “राज्य की विधानसभा” पढ़ा जाएगा।
    हमेशा से बी0जे0पी0 सरकार ऐतिहासिक फैसलो के लिए जानी जाती है जिसमे इस बिल ने भी अपनी एक ऐतिहासिक जगह दर्ज की है।

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