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सत्ता व धन-बल के नशे में चूर हैं भाजपा के कुछ नेता व अभिनेता, पत्रकारों को देते हैं जान से मारने की धमकी

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श्यामजी मिश्रा

सैकड़ों साल पहले तुलसीदास जी ने कहा था कि समय के साथ भले ही लोगों के स्वभाव में उनके विचारों में, उनके रहन-सहन में, कितने भी बदलाव आ जायें, पर उसके घमंड का स्वभाव कभी नहीं बदल पायेगा। प्रकृति का गुस्सा या अनहोनी अचानक ही नहीं घटती। बहुत पहले से ही वह अपने अच्छे बुरे बदलाव का आभास देने लग जाती है। ऐसे एक बदलाव की पदचाप दूर से ही आती मेहसूस होने लगी है। रोज रोज भ्रष्टाचार, तानाशाही और मंहगाई की मार से मुश्किल होती जिंदगी से देश का हर आदमी बुरी तरह त्रस्त है। अपने सामने गलत लोगों को गलत तरीके से अमीर होते और पैसों के दम पर हर क्षेत्र में अपनी मनमानी करते और इधर खुद और अपने परिवार की जिंदगी दिन प्रतिदिन दूभर होते देखकर अब एक गुस्सा उसके दिलो-दिमाग में जगह बनाता जा रहा है। अगर इसका कहीं विस्फोट हो गया तो ऐसे भ्रष्ट लोगों का क्या अश्र होगा तथा उनके संरक्षक किस बिल को ढूढ़ेंगे अपना अस्तित्व बचाने के लिए इसकी तो कल्पना करना भी मुश्किल है। अभी भी हालात उतने नहीं बिगड़े हैं, अभी भी हाथ में समय है उन जड़-विहीन, बड़बोले, चापलूस, तिकड़मबाज तथाकथित नेताओं के पास कि वे इस बदलाव को समझें और अपना रवैया बदलें, सुधर जायें, नहीं तो जनता उन्हें सुधारने में वक्त नहीं लगायेगी। देश की जनता का एक बहुत बड़ा प्रतिशत नेताओं व उनके चमचों से असंतुष्ट हैं। उनकी असलियत भी जनता जानने लग गई है। आज लाइन के आखिरी सिरे पर खड़ा आदमी भी कुछ जागरूक हो गया है। वो भी जानने लगा है कि अब पहले जैसे नेता नहीं रहे, जिनके लिए देश ही सबकुछ हुआ करता था। आज तो सभी नेताओं के लिए सिर्फ मेरा व मेरे परिवार का स्वार्थ ही रह गया है। कुछ लोग मेहनत व योग्यता की मदद से नहीं बल्कि तिकड़म से या जुगाड़ से या बाहुबल से और ज्यादातर नेता पैसों के दम पर सत्ता की शक्ति हासिल कर लेते हैं। ऐसे लोगों में योग्यता तो होती नहीं इसलिए उन्हें सदा अपना स्थान खो देने की आशंका बनी रहती है। इसी आशंका के कारण उनके दिलों दिमाग में क्रोध और आक्रोश इस तरह भर जाता है कि उन्हें हर आदमी अपना दुश्मन और दूसरे की जरा सी विपरीत बात भी अपनी बेइज्जती लगने लगती है। ऐसे लोग नीच हरकत करने से भी बाज नहीं आते।

 

अभी कुछ दिन पहले उमरगांव तालुका सोणसुंबा के सरपंच अमित पटेल ने

 

अपने पद, परिवार और राजनीतिक संबंधों के गुरूर में इंडिया हाईलाइट्स अखबार के संपादक पीनल पटेल को अपने कार्यालय में बुलाकर भद्दी भद्दी गालियाँ देते हुए जान से मारने की धमकी दी। इंडिया हाईलाइट अखबार कई वर्षों से उमरगांव तालुका व समग्र वलसाड जिला, सूरत व संघप्रदेश में अनेक सामाजिक व राजकीय क्षेत्र में अपना फर्ज अदा कर रही है तथा भ्रष्टाचार के खिलाफ एक आवाज बनकर उभरी इंडिया हाईलाइट अखबार अब भ्रष्ट नेताओं और अधिकारियों को खलने लगा है। यही कारण था कि पिछले दिनों सोणसुंबा गांव के मूल कांग्रेसी व अब भाजपा के अग्रणी मणिलाल पटेल व पुत्र अमित पटेल ने एक पत्रकार के साथ गाली-गलौच देकर जान से मारने की धमकी दी। इन दोनों पिता – पुत्र ने अपनी सत्ता का दुरुपयोग व राजनीतिक पहुंच के बल पर उमरगांव तालुका में अवैध रूप से बिल्डिंगों का निर्माण व  जमीनों पर कब्जा कर अवैध बांधकामों का निर्माण करने का काम करते हैं। अगर कोई पत्रकार इन अवैध निर्माणों के बारे में लिखता है तो उसे आफिस में बुलाकर पिता-पुत्र मिलकर उसके साथ मारपीट व जान से मारने की धमकी देते हैं। इसी तरह अभी हाल ही में भोजपुरी के सिने स्टार निरहुवा यादव ने वरिष्ठ पत्रकार शशिकांत सिंह को फोन करके इसलिए गाली-गलौज की और जान से मारने की धमकी दी कि उन्होंने निरहुवा यादव के फिल्म की सच्चाई लिख दी थी। वैसे देखा जाए तो आजकल मोदी राज में पत्रकारों पर हमले कुछ ज्यादा ही हो रहे हैं। आपको याद होगा कि कुछ महीनों पहले बाबा रामदेव ने कहा था कि हमारे देश में 90 प्रतिशत नेता भ्रष्ट हैं। यह खबर टीवी पर भी बहुत चली। बाबा रामदेव ने योग को जन जन तक पहुंचाया है। उन्होंने स्वदेशी की अवधारणा को साकार करके दिखाया है। पतंजलि उत्पादों के कारोबार से लाखों लोगों को रोजगार दिया है। वे जो बोलते हैं पूरी जिम्मेदारी से बोलते हैं। नेताओं की भ्रष्ट होने की बात उन्होंने कही है तो जरूर यह उनका व्यक्तिगत अनुभव भी रहा होगा। नेता शब्द का पहला प्रयोग सुभाष चन्द्र बोस के लिए किया गया था। आजाद हिंद फौज के आंदोलन से नेता और जय हिंद शब्दों का प्रचलन हुआ था। उस वक्त नेता शब्द बड़े सम्मान का सूचक शब्द था। तब नेता के इशारे से देश के नौजवान मचल उठते थे और देश के लिए अपने प्राणों का बलिदान देने को भी तैयार हो जाते थे। पर दुर्भाग्य से आज नेता शब्द गाली बन गया है। यहां तक कि अब सरकार को नेताओं के भ्रष्टाचार के खातिर अलग से कोर्ट बनाने पड़े। आज सारे देश के 1600 बड़े नेताओं पर भ्रष्टाचार के 13000 कोर्ट केस चल रहे हैं। उनका शीघ्र निपटान के लिए 12 स्पेशल कोर्ट बनाये गये हैं। आज बसों में रोड पर चलते हुए या चाय की दुकानों पर नेताओं के बारे में क्या चर्चा होती है  ? लोग खुलेआम नेताओं की निंदा करते हैं, उनको गालियां देते हैं, नेताओं को कुर्सियों पर बैठे चोर डाकू कहते हैं। एकाध बार ही किसी एक नेता के बारे में अच्छी चर्चा सुनने को मिलती है। अभी अभी गुजरात के विधानसभा चुनाव में 6 लाख  वोटरों ने नोटा का प्रयोग करके यह संदेश दिया है कि उन्हें किसी भी नेता पर भरोसा नहीं है। आगे जाकर ऐसी वोटरों की संख्या बढ़ने वाली है। लोग अब तो यहां तक बोलने लगे हैं कि कॉर्पोरेशन के नगरसेवक, विधानसभा के विधायक और लोकसभा-राज्यसभा के सांसद सबके सब भ्रष्ट हैं। अगर ऐसा है तो यह बात हमारे देश के लिए बेहद चिंताजनक है। आजादी के 70 साल बाद आज हमारा देश ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल के अनुसार दुनिया के सबसे भ्रष्ट देशों में से एक है। आज पद और पैसे की भूख एक पागलपन बन गई है। लगता है पूरे समाज के खून में भ्रष्टाचार समा गया है। इसके कई कारण हैं, लेकिन सबसे बड़ा कारण ऊंची कुर्सियों पर बैठे हुए नेताओं का भ्रष्टाचार है। बड़े नेताओं के त्यागमय आदर्श जीवन को देखकर ही नीचे के लोगों को प्रेरणा मिलती है। भ्रष्टाचार के कैंसर का रोग ऊपर से नीचे को आता है। सार्वजनिक जीवन का यह पतन एक गंभीर समस्या है। स्पेशल कोर्ट से ही आशा है कि वो नेताओं के केस को शीघ्र निपटाएं ताकि कुछ नेता जेल में जायें और शेष उन्हें देखकर सुधर जायें।

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