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मिशन-2019: विपक्ष का ‘यूनाइट इण्डिया’ कितना कारगर!

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मिशन-2019: विपक्ष का ‘यूनाइट इण्डिया’ कितना कारगर!

(प्रशान्त शुक्ल)

विविधता में एकता का कलेवर ही हिंदुस्तान की पहचान रहा है। चाहे वो सियासी तौर पर चेहरों की बनावट और मंचों की सजावट हो या फिर पश्चिम बंगाल में 22-22 ऐसे राजनीतिक दलों का न सिर्फ एक साथ मंच साझा करना बल्कि पिछले साढ़े चाल से सत्ता पर काबिज भारतीय जनता पार्टी की नरेंद्र मोदी सरकार को जड़ से उखाडफेंकने का आह्वान हो।

देश के सबसे बड़े और राजनीतिक तौर पर सबसे अहम सूबे उत्तर प्रदेश से अखिलेश आए, बिहार की तस्वीर बदलने का नारा देने वाले तेजस्वी आए, तो राहुल के राजनीतिक रहनुमां मल्लिकार्जुन खड़गे भी ममता बनर्जी की अगुवाई वाली रैली में कोलकाता के ब्रिगेड परेड ग्राउंड पर बीजेपी को अपने अंदाज़ में खूब परेड करवाई। तो भ्रष्टाचार के खिलाफ छिड़े 2011 के अन्ना आंदोलन से उपजे अरविंद केजरीवाल भी आए।

ये सियासत की सौदेबाज़ी और मौकापरस्ती ही है, कि जो राज्यों में एक दूसरे के धुर विरोधी हैं, वो 2019 में केंद्र सरकार को हराने के लिए गलबहियां कर रहे हैं। कोलकाता के ब्रिगेड परेड ग्राउंड पर सियासी गठजोड़ की अद्भुत तस्वीर देखने को मिली।

उत्तर प्रदेश में एक दूसरे के विरोधी सपा-बसपा जहां पहले ही गठबंघन कर चुके हैं, तो वहीं कांग्रेस के खिलाफ हल्लाबोल कर खुद के लिए राजनीतिक संजीवनी ढूंढ निकालने वाले अरविंद केजरीवाल भी पहुंचे और न सिर्फ पहुंचे बल्कि अपने भाषण में पाकिस्तान से लेकर फ्रांस तक मोदी को कोसा। यहां तक कह दिया, कि लोगों को बांटने का जो काम पाकिस्तान पिछले 70 सालों में नहीं कर सका वो काम अमित शाह और मोदी की जोड़ी ने पिछले साढ़े चार सालों में कर दिया।

अब आपको सियासी गुणा गणित और उस विविधता के बारे में बताते हैं, जिसका ज़िक्र मैंने शुरुआत में किया था। तो जो आम आदमी आदमी पार्टी आज कांग्रेस के साथ मंच साधा करते हुए मोदी को सत्ता से खदेड़ने की बात करती नज़र आई, वहीं आम आदमी पार्टी और कांग्रेस पंजाब और दिल्ली में एक दूसरे के धुर विरोधी हैं। जिन ममता बनर्जी की रैली में कांग्रेस नेता मल्लिकार्जुन खड़गे राहुल के अर्जुन बनकर पहुंचे उन्हीं की पार्टी, पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी सरकार के खिलाफ हल्लाबोल अभियान छेड़े हुए है।

जो सपा-बसपा-कांग्रेस पार्टी ममता की रैली में मंच साझा कर रही हैं, उन्होंने ही प्रदेश में गठबंधन से कांग्रेस को बाहर का रास्ता दिखा दिया। और जो ममता बनर्जी 2012 में केंद्र की यूपीए सरकार से समर्थन वापस लेने की धमकी दे रही थी..या यूं कहें कि कांग्रेस के निकलकर तृणमूल कांग्रेस बनाने वाली ममता बनर्जी का समर्थन कांग्रेस कर रही है।

बात यहीं खत्म नहीं होती है, इस रैली में भारतीय जनता पार्टी के वो दिग्गज भी शरीक हुए, जिन्हे पूर्ववर्ती अटल बिहारी सरकार का पिलर समझा जाता था। पटना साहिब से भारतीय जनता पार्टी के सांसद शत्रुघ्न सिन्हा अपनी सरकार और प्रधानमंत्री पर आरोपों की झड़ी लगा दी तो कुछ दिन पहले ही पार्टी छोड़ने वाला यशवंत सिन्हा ने मोदी सरकार को आज़ादी के बाद अबतक की सबसे ज्यादा झूठी सरकार करार दे दिया। अरुण शौरी से लेकर, यशवंत सिन्हा तक वर्तमान मोदी सरकार को हर उस मोर्चे पर घेरा जिस पर कांग्रेस आए दिन हल्ला करती है।

अब बात काम की, कि आखिर कोलकाता के ब्रिगेड परेड ग्राउंड पर यूनाइट इंडिया की नौटंकी करने की ज़रूरत क्यों पड़ी और इस नौटंकी के पात्र आखिर मायावती और राहुल गांधी क्यों नहीं बने। और तीसरे मोर्चे को लेकर चंद्र बाबू नायडू, नवीन पटनायक, अखिलेश यादव, तेजस्वी यादव और फारुख अबदुल्ला तक वाले इस ऊबड़खाबड़ रास्ते को सपाट करने की बेचैनी आखिर हैं क्यों। सवाल दरअसल कई हैं और इन सबके जवाब, नेताओं के साथ अपने अपने हैं।

बंगाल में बीजेपी के नेता खुद मान चुके हैं कि बंगाल से अगर कोई चेहरा प्रधानमंत्री लायक है तो वो सिर्फ ममता बनर्जी ही हैं, तो मायावती का भी नाम इस रेस में चल ही रहा है। लेकिन इन सबके बीच सवाल ये है कि आज जुटी इन पार्टियों का एक साथ मंचासीन होना और राहुल गांधी की प्रधानमंत्री पद की दावेदारी का कितने मील अंतर पैदा करता है।

या फिर कांग्रेस इस गड़बड़झाले से निकले कैसे क्योंकि कांग्रेस ये कतई नहीं चाहेगी की किसी भी गठबंधन की अगुवाई कांग्रेस के अलावा देश में कोई और पार्टी करे। सवाल ये भी है कि चुनाव से पहले जिस तीसरे मौर्चे की सुगुबुगाहट शुरू हुई है, उससे बीजेपी कैसी निपटेगी और राज्यों में राजनीतिक पार्टियों का सीटों और गठबंधन को लेकर झगड़ा दिल्ली तक आते-आते कैसे थमेगा या फिर अलग-अलग होकर भी किस समीकरण से अगला चुनाव एक साथ लड़ा जाएगा।

बहरहाल 2014 में गोधरा और मोदी वर्सेज ऑल के विक्टिम कार्ड ने बीजेपी को काफी फायदा पहुंचाया था, और अगर इस बार भी ऐसे मौके भारतीय जनता पार्टी को मिलेंगे तो बीजेपी इसे भुनाने में कोई कसर नहीं छोड़ेगी।

 

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